कोलकाता (द थर्सडे टाइम्स) — परिवारों के बयानों और पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक़, हिंदू राष्ट्रवादी संगठन बजरंग दल से कथित तौर पर जुड़ी दस से ज़्यादा लोगों की भीड़ ने इस हफ़्ते दो दिनों के दौरान पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर ज़िले में तीन ईसाई परिवारों पर हमला किया, उन्हें पीटा, उनसे ज़बरदस्ती हिंदू शुद्धिकरण के अनुष्ठान करवाए और पुलिस के पास जाने पर ज़िंदा जला देने की धमकी दी।
ये हमले चंद्रकोना थाना क्षेत्र के पटलापुर और डिंगल गाँवों में हुए। तीन साल पहले ईसाई धर्म अपनाने वाली 40 वर्षीय लक्ष्मी मंडल ने बताया कि भीड़ 18 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:30 बजे उनके घर में घुस आई, उन्हें थप्पड़ मारे और सिर पर तब तक मारती रही जब तक वे बेहोश नहीं हो गईं, फिर उनके कपड़े उतारे और जिसे भीड़ ने हिंदू शुद्धिकरण का अनुष्ठान कहा, उसके तहत उन्हें ज़बरदस्ती नहलाया।
‘कोई ईसाई इस हिंदू मोहल्ले में नहीं रह सकता’
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक़, भीड़ ने मंडल की देवरानियों/जेठानियों बोनोश्री और सरस्वती मंडल के घरों पर भी हमला किया, उन्हें लोहे की रॉड से मारा और सरस्वती के घर से 20,000 रुपये चुरा लिए। शिकायत के अनुसार, बोनोश्री की 15 वर्षीय बेटी का गला घोंटा गया और परिवारों की नाबालिग लड़कियों को बलात्कार और अपहरण की धमकी दी गई।
मंडल ने बताया कि भीड़ ने उनसे कहा, “कोई ईसाई इस हिंदू मोहल्ले में नहीं रह सकता,” और हमले से पहले करीब एक साल से परिवारों को ज़बानी धमकियाँ मिल रही थीं। उन्होंने कहा, “हम अब भी दहशत में हैं।”
जब मंडल ने पुलिस को फ़ोन किया, तो अधिकारी शाम करीब 6:30 बजे पहुँचे, लेकिन उनके मुताबिक़ उन्होंने कोई सुरक्षा नहीं दी और जल्द ही चले गए, जिससे उनका मानना है कि भीड़ के हौसले बढ़ गए। भीड़ अगले दिन फिर लौटी और मंडल, बोनोश्री और उनके पतियों को डिंगल गाँव के एक दुर्गा पूजा पंडाल में ले गई, जहाँ चारों को पुष्पांजलि अर्पित करने पर मजबूर किया गया, जो फूलों से की जाने वाली एक हिंदू प्रार्थना है। 20 अक्तूबर को मंडल के पति को किसी अज्ञात जगह ले जाया गया और धमकी दी गई कि अगर परिवार ने ईसाई धर्म नहीं छोड़ा तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा; कुछ घंटों बाद उन्हें छोड़ दिया गया, जिसके बाद परिवार के घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई।
एफ़आईआर दर्ज, अब तक कोई गिरफ़्तारी नहीं
पुलिस ने पहले हमले के दो दिन बाद 13 लोगों के ख़िलाफ़ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की, जिसमें आपराधिक अतिक्रमण, हत्या की कोशिश, कपड़े उतारने की नीयत से हमला, चोरी, आपराधिक धमकी और महिला की मर्यादा भंग करने की धाराएँ शामिल हैं। ताज़ा रिपोर्टों तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई थी।
मंडल ने हमलावरों की पहचान पड़ोसी गाँवों के ऐसे निवासियों के रूप में की जो बजरंग दल से जुड़े हैं। संगठन की कथित भूमिका के बारे में पूछे जाने पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सिर्फ़ इतना कहा कि मामले की "जाँच की जा रही है।"
पश्चिम बंगाल के ईसाई नेताओं का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य में सत्ता में आने के बाद से समुदाय पर हमले, जिनमें गिरजाघरों में बाधा डालना और तोड़फोड़ शामिल है, बढ़ गए हैं। ईसाई संगठनों का कहना है कि उन्होंने राज्य में कम से कम 13 एफ़आईआर और ऐसी 60 से ज़्यादा घटनाएँ दर्ज की हैं, जिनमें से बहुत कम में कार्रवाई हुई है। 2011 की जनगणना के मुताबिक़ पश्चिम बंगाल की आबादी में ईसाइयों की हिस्सेदारी लगभग 0.72% यानी करीब 6,50,000 लोग हैं।∎



